कांग्रेस का घोषणा पत्र क्या उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दिला पाएगा?
कांग्रेस पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र का ऐलान कर दिया। घोषणा पत्र लोगों को कितना पसंद आया, इस बात का पता तो चुनाव के बाद ही चलेगा, जब चुनाव परिणाम आएंगे। मगर कांग्रेस का घोषणा पत्र किन बातों पर आधारित है और कौन-कौन सी बातें हैं जो दूसरों से अलग हैं। यह सब हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे। दरअसल कांग्रेस का घोषणा पत्र में तीन मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। पहला है रोजगार ,दूसरा है किसानों की मदद और तीसरा है महिला सुरक्षा। कांग्रेस के घोषणापत्र में जिस विषय के बारे में सबसे ज्यादा बात की गई है वह है कांग्रेस की न्याय योजना।
घोषणा पत्र को घोषणा पत्र को अच्छे से समझने के लिए घोषणा पत्र के मुख्य बिंदुओं/ को समझना अति आवश्यक है जोकि निम्नलिखित हैं-
- मनरेगा में मजदूरों को 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिनों की रोजगार की गारंटी
- जो मजदूर किसी कारणवश कर्ज नहीं चुका पाते पुल पर क्रिमिनल केस नहीं बल्कि सिविल केस दर्ज होगा
- हर गरीब के खाते में ₹72000 वार्षिक देंगे
- किसानों के लिए अलग से बजट
- मार्च 2020 तक 22 लाख सरकारी पदों को भरा जाएगा
- 20 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत में नौकरी
- 3 साल तक बिना लाइसेंस कारोबार करने की छूट
कांग्रेस के इस घोषणापत्र को तैयार करने वाली कमेटी के अध्यक्ष पी चिदंबरम थे। राहुल गांधी ने बताया कि यह घोषणा पत्र जनता की बात को लेकर तैयार कर किया गया है। इसमें नेताओं की राय का कोई योगदान नहीं है बल्कि यह जनमत ही राय है। पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि भारतीय जनता पार्टी तो आतंकवाद और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रही है। आप इस पर क्या करेंगे तो राहुल गांधी ने कहा कि हमने हमेशा ऐसे ही मूलभूत मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा है।
बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उसे भुनाने का पूरा प्रयास किया। वहीं कांग्रेस पार्टी एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा कर बुरी तरह फस चुकी है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी ने न्याय स्कीम और 22 लाख नौकरियां देकर चुनाव के मुद्दे को बदलने का प्रयास किया। मगर कांग्रेस के घोषणापत्र में कुछ बातें ऐसी हैं जो भाजपा के नेताओं को और पूरे देश को बहुत चूभेंगी। अरुण जेटली ने कांग्रेस के घोषणापत्र में देशद्रोह का कानून वाली धारा को हटाने और धारा 370 ना हटाहटाने की घोषणा का विरोध किया है। वहीं अरुण जेटली ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में अब AFSPA कानून हटाने की घोषणा करके कांग्रेस ने देश को तोड़ने का प्रयास किया है।
कांग्रेस के घोषणापत्र में कुल जीडीपी का 6% शिक्षा पर खर्च करने की बात की गई है। मगर अगर पूरे विश्व में देखा जाए तो कोई भी देश अपनी कुल जीडीपी का 6% शिक्षा पर नहीं खर्च करता है। कांग्रेस की यह बात पूरी तरह से निराधार लगती है क्योंकि अचानक शिक्षा पर इतनी बड़ी रकम खर्च कर देना संभव नहीं लगता है।
कांग्रेस ने घोषणा पत्र में यह भी वादा किया है कि अगर उनकी सरकार आई तो आने वाले समय में बीते 5 सालों में राफेल समेत जितने भी सेना के उपकरणों के साधे हुए हैं उनकी नए सिरे से जांच कराई जाएगी।
कांग्रेस का कहना है कि उसमें घोषणा पत्र जनमत की बातों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। मगर अगर घोषणा पत्र को देखा जाए तो राष्ट्रद्रोह का कानून हटाना, जम्मू कश्मीर से धारा 370 का ना हटाने की बात करना यह सब बातें जनमत से प्रेरित नहीं लगती हैं। हालांकि कांग्रेस का यह घोषणा पत्र कितना मजबूत है यह तो चुनाव के बाद चुनाव परिणाम से पता लग ही जाएगा। फिलहाल कांग्रेस के इस घोषणा पत्र पर भारतीय जनता पार्टी का हमला जारी है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



